ड्राइंगरूम मे किसी चीज़ के टूटने की आवाज़ से रीतू दौड़ कर वहाँ पँहुची पर तब तक रोमा भाभी ने बंटी को एक थप्पड़ जड़ दिया था। माँ को देखते ही बंटी रोते हुए दौड़ कर माँ से चिपट गया। सामने ही कांच का गुलदान ज़मीन पर टुकड़ों मे पड़ा था जो शायद बंटी और राजू के खेलने में मेज़ से गिर गया था।
रोमा पहले तो ननद को देख कर सकपकाई फिर अपने बेटे राजू को जबरन घसीटते हुए बाहर ले जाने लगी। राजू भी रोया तो रीतू ने उसे संभालने की कोशिश की पर रोमा ने उसका हाथ झटक दिया......”रहने दीजिए… ये तो अब आए दिन हुआ करेगा”।
रीतू का दिल धक् से रह गया… भाभी की आवाज़ मे उतरा रूखापन उसे भीतर तक हिला गया..’अभी तो उसे मायके आए एक महीना भी नहीं हुआ… और अभी से…’
उसके ज़हन मे उस दिन का वाकया घूम गया जिस दिन वो यहाँ आई थी। बात छोटी सी थी पर किसी ने नहीं सोचा था कि कुछ ही देर में वह इतना तूल पकड़ लेगी।एक काँच का प्याला ही तो उसके हाथ से गिर कर टूटा था जिस पर उसके पति रवि ने कहा था...
“रीतू सम्भाल कर काम किया करो..यह टी सैट दीदी जापान से लाई थीं”, और वह बिफर उठी थी,
”तो क्या मैंने जानबूझकर तोड़ दिया” और फिर बात इतनी बढ़ी कि यहां तक नौबत आ गई कि रीतू ने अपना सूटकेस पैक कर लिया” मैं तुम्हारे साथ अब एक मिनिट भी और नहीं रह सकती”
“ठीक है, रोकता कौन है तुम्हें...” रवि का जबाब था।
घर पर माँ भाई ने कारण पूछा तो उसका एक ही जबाब था, “मैं उसके साथ नहीं रह सकती”
पर आज….उसका सर घूम गया…’एक प्याले की चटख से वह मायके आ गई पर अब….बंटी के गाल पर पड़ा थप्पड़ ...उसका दिल तड़प कर रह गया। माँ के कभी कहे शब्द उसके कानों में गूंज गए,’ भाई भाभी के घर मे ब्याही बेटी की गुज़र नहीं होती….अपना घर जैसा भी हो अपना ही होता है’ बेटे को कस कर सीने से लगाते हुए उसने रवि को फोन मिला दिया,”मैं घर आना चाहती हूँ”
“तुम्हारा घर है इसमें पूछना क्या।” रवि का जबाब था।
“मुझे माफ कर दो…गलती शायद मेरी ही थी” घर पंहुचते ही बिना किसी लागलपेट के उसने कहा तो रवि ने प्यार से उसके हाथ पकड़ लिए,”गलती मेरी भी थी...एक प्याला मेरे प्यार और परिवार से ज़्यादा तो नहीं था”
“फिर तुम मुझे लेने क्यों नहीं आए?”
“रीतू….तुम्हारे जाते ही मुझे अपनी गलती का अहसास हो गया था पर मैं चाहता था कि तुम्हें भी इस बात का अहसास हो ताकि भविष्य मे हम इतनी छोटी छोटी बातों को तूल न दें। हमारे प्यार से बड़ा कुछ भी नहीं है” रीतू के हाथों को चूम कर उसने बंटी को गोद मे उठा लिया।
एक प्याला टूट कर उन्हें बहुत कुछ सिखा गया था....
रोमा पहले तो ननद को देख कर सकपकाई फिर अपने बेटे राजू को जबरन घसीटते हुए बाहर ले जाने लगी। राजू भी रोया तो रीतू ने उसे संभालने की कोशिश की पर रोमा ने उसका हाथ झटक दिया......”रहने दीजिए… ये तो अब आए दिन हुआ करेगा”।
रीतू का दिल धक् से रह गया… भाभी की आवाज़ मे उतरा रूखापन उसे भीतर तक हिला गया..’अभी तो उसे मायके आए एक महीना भी नहीं हुआ… और अभी से…’
उसके ज़हन मे उस दिन का वाकया घूम गया जिस दिन वो यहाँ आई थी। बात छोटी सी थी पर किसी ने नहीं सोचा था कि कुछ ही देर में वह इतना तूल पकड़ लेगी।एक काँच का प्याला ही तो उसके हाथ से गिर कर टूटा था जिस पर उसके पति रवि ने कहा था...
“रीतू सम्भाल कर काम किया करो..यह टी सैट दीदी जापान से लाई थीं”, और वह बिफर उठी थी,
”तो क्या मैंने जानबूझकर तोड़ दिया” और फिर बात इतनी बढ़ी कि यहां तक नौबत आ गई कि रीतू ने अपना सूटकेस पैक कर लिया” मैं तुम्हारे साथ अब एक मिनिट भी और नहीं रह सकती”
“ठीक है, रोकता कौन है तुम्हें...” रवि का जबाब था।
घर पर माँ भाई ने कारण पूछा तो उसका एक ही जबाब था, “मैं उसके साथ नहीं रह सकती”
पर आज….उसका सर घूम गया…’एक प्याले की चटख से वह मायके आ गई पर अब….बंटी के गाल पर पड़ा थप्पड़ ...उसका दिल तड़प कर रह गया। माँ के कभी कहे शब्द उसके कानों में गूंज गए,’ भाई भाभी के घर मे ब्याही बेटी की गुज़र नहीं होती….अपना घर जैसा भी हो अपना ही होता है’ बेटे को कस कर सीने से लगाते हुए उसने रवि को फोन मिला दिया,”मैं घर आना चाहती हूँ”
“तुम्हारा घर है इसमें पूछना क्या।” रवि का जबाब था।
“मुझे माफ कर दो…गलती शायद मेरी ही थी” घर पंहुचते ही बिना किसी लागलपेट के उसने कहा तो रवि ने प्यार से उसके हाथ पकड़ लिए,”गलती मेरी भी थी...एक प्याला मेरे प्यार और परिवार से ज़्यादा तो नहीं था”
“फिर तुम मुझे लेने क्यों नहीं आए?”
“रीतू….तुम्हारे जाते ही मुझे अपनी गलती का अहसास हो गया था पर मैं चाहता था कि तुम्हें भी इस बात का अहसास हो ताकि भविष्य मे हम इतनी छोटी छोटी बातों को तूल न दें। हमारे प्यार से बड़ा कुछ भी नहीं है” रीतू के हाथों को चूम कर उसने बंटी को गोद मे उठा लिया।
एक प्याला टूट कर उन्हें बहुत कुछ सिखा गया था....
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